भक्ति की दुनिया में कुछ भजन ऐसे होते हैं जो सीधे दिल से निकलकर श्रोता के हृदय तक पहुँच जाते हैं। “Sanwariya Thaara Lakho Bhakt Re, Thane Ek Ki Kai Garaj Re” भी ऐसा ही एक भावनात्मक भजन है—जो भक्त की बेबसी, उसकी पुकार और भगवान पर अटूट विश्वास को सरल शब्दों में सामने रखता है।
यह भजन केवल शब्दों का संगम नहीं, बल्कि हर उस इंसान की कहानी है जो दुनिया की ज़िम्मेदारियों के बीच भी अपने सांवरिया से एक बार गले लगने की आस रखता है।
Sanwariya Thaara Lakho Bhakt Re, Thane Ek Ki Kai Garaj Re Song Lyrics
सांवरिया थारा लाखों भगत रे
थाने एक की काई गरज रे
अर्ज कर-कर मैं हार गयो
यू परायो मत समझ रे
सांवरिया थारा लाखों भगत रे
थाने एक की काई गरज रे
अर्ज कर-कर मैं हार गयो
यू परायो मत समझ रे
यू परायो मत समझ रे
उम्र में हूं छोटो पर घर को बड़ो कहलाऊ रे
दुनिया में जख्म मिले तो कुन ने सुनाऊं रे
उम्र में हूं छोटो पर घर को बड़ो कहलाऊ रे
दुनिया में जख्म मिले तो कुन ने सुनाऊं रे
बाल नहीं आवे ई बालक पे
बस एक बार गले लगा ले
बाल नहीं आवे ई बालक पे
बस एक बार गले लगा ले
सांवरिया थारा लाखों भगत रे
थाने एक की काई गरज रे
प्रॉपर्टी के नाम पे मिली बस ज़िम्मेदारी रे
बार-बार ख्याल आवे छोड़ दे दुनियादारी ने
प्रॉपर्टी के नाम पे मिली बस ज़िम्मेदारी रे
बार-बार ख्याल आवे छोड़ दे दुनियादारी ने
छोड़ जाऊ ला मैं दुनिया ने तो
परिवार कुन संभाले
छोड़ जाऊं ला मैं दुनिया ने तो
परिवार कुन संभाले
सांवरिया थारा लाखों भगत रे
थाने एक की काई गरज रे
मिल जावे सहारो चौखट को
जिंदगी म्हारी कट जावेली
अतरो करता कुछ नहीं होयो तो
दुनिया ताना मार ली
मिल जावे सहारो चौखट को
जिंदगी म्हारी कट जवेली
अतरो करता कुछ नहीं होयो तो
दुनिया ताना मार ली
पंकज भी रोवन लाग्यो
अब अतरो मत अकड़ रे
पंकज भी रोवन लाग्यो
अब अतरो मत अकड़ रे
सांवरिया थारा लाखों भगत रे
ठाणे एक की काई गरज रे
भजन का भावार्थ (Meaning & Feeling)
भजन की पंक्तियाँ बताती हैं कि
“तेरे लाखों भक्त हैं सांवरिया, पर मुझे भी तेरी ज़रूरत है।”
यह पंक्ति हर उस व्यक्ति की आवाज़ है जो खुद को भीड़ में छोटा समझता है, लेकिन भरोसा रखता है कि भगवान सबकी सुनते हैं—खासतौर पर उस एक की, जो टूटकर भी उम्मीद नहीं छोड़ता।
भजन में जीवन के संघर्ष, परिवार की जिम्मेदारियाँ, समाज के ताने, और भीतर की पीड़ा—सब कुछ बहुत सहजता से उभरकर आता है।
बचपन, ज़िम्मेदारियाँ और भीतर की पीड़ा
भजन का एक गहरा हिस्सा वह है जहाँ गायक कहता है कि उम्र में छोटा होते हुए भी घर की ज़िम्मेदारी उठानी पड़ रही है।
दुनिया से मिले ज़ख्मों को वह खुद में ही समेट लेता है—क्योंकि हर दर्द कहने का समय नहीं होता।
यही वह भाव है जो इस भजन को आम भक्त से जोड़ देता है।
यह सिर्फ भजन नहीं, जीवन का आईना है।
सांवरिया से एक ही अरदास
भक्त की अरदास बहुत छोटी है—
“बस एक बार गले लगा ले।”
ना धन की मांग, ना यश की चाह—
सिर्फ प्रभु की चौखट पर सहारा।
यही कारण है कि यह भजन सुनते समय आँखें नम हो जाती हैं और मन अपने आप ही प्रभु की ओर झुक जाता है।
संगीत और प्रस्तुति की खूबसूरती
भजन का संगीत बहुत सादा, लेकिन आत्मा को छू लेने वाला है।
धीमी-धीमी धुन और भावपूर्ण गायन शब्दों को और भी प्रभावशाली बना देता है।
हर अंतरे के साथ भाव और गहराते जाते हैं, और श्रोता खुद को भजन का हिस्सा महसूस करने लगता है।
क्यों खास है यह भजन?
- यह भजन आम इंसान की सच्ची पुकार है
- शब्द सरल हैं, लेकिन भाव बहुत गहरे
- जीवन की हकीकत और भक्ति का सुंदर मेल
- सुनते ही मन शांत हो जाता है
निष्कर्ष
“Sanwariya Thaara Lakho Bhakt Re, Thane Ek Ki Kai Garaj Re”
सिर्फ एक भजन नहीं, बल्कि एक भरोसा है—कि चाहे दुनिया साथ दे या न दे,
सांवरिया हमेशा सुनते हैं।
अगर आप जीवन में कभी थके हों, टूटे हों या अकेलापन महसूस कर रहे हों—
तो यह भजन जरूर सुनिए।
शायद आपकी भी वही अरदास, वही पुकार, सांवरिया तक पहुँच जाए।
🙏 जय श्री श्याम 🙏